इंसाफ और मसावात (समानता) से भरपूर ऐतिहासिक फैसला

By Varsha Sharma, Word for Peace


फत्हे मक्का का वक़्त था। फातिमा नाम कि एक मख़ज़ूमी औरत चोरी के जुर्म में गिरफ्तार हुई ।  चुंकि  वह एक बा-असर क़बीले से ताल्लुक रखती थी इसलिए क़ुरैश के कुछ लोग उसकी गिरफ़्तारी पर बड़े बेचैन हुए।  और उनका ज़हन यह क़बूल करने के लिए तैयार नही हो रहा था की इस औरत को भी कानून के उसी हुकूम में दाखिल किया जायेगा जो आम लोगो के लिए है। इसलिए लोगो ने मंत्रणा की  कि  रसूलुल्लाह सलल्लाहो अलैहि वसल्लम से कह  कर उसे छुड़वा लिया जाये और इस गरज़ से उन्होंने ओसामा बिन ज़ैद (रज़ियल्लाहो अन्हु) को सिफारशी के तौर  पर हुजूर की  ख़िदमत  में भेज दिया।  हुजुर सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम के चेहरे का रंग बदल गया और आप ने फ़रमाया, क्या  तुम अल्लाह की एक हद के बारे में (उसे रुकवाने की) दरख्वास्त करते हो ? यह सुनकर हजरत  ओसामा बिन ज़ैद राज़िअल्लाह  अन्हु ने हुजुर से माफ़ी मांगी।  इस मोके पर हुजुर ने इंसाफ और मसावात (समानता) से भरपूर यह ऐतिहासिक  फैसला फरमाया  की अगर फातिमा बिनत मुहम्मद (सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम ) से भी चोरी का जुर्म हो जाये  तो उनका हाथ भी काटा  जायेगा।

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