इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं हैं Mosques/Temples are places of seeking peace, not for conflicts

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रत्नागिरी/15 नवम्बर

इबादतगाहें शांति प्राप्त करने के लिए हैं लड़ाने का सामान नहीं हैं. इन विचारों को आल इंडिया उलमा व मशायिख बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष हज़रत सय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने एक जलसे को सम्बोधित करते हुए रखा उन्होंने कहा लोग दुनिया से ऊब कर सुकून हासिल करने के लिए इबादतगाहों का रुख करते हैं ताकि अपनी आत्मा को शांत कर सकें जो परवरदिगार की इबादत से ही मुमकिन है लेकिन अफ़सोस सियासत ने इबादतगाहों को लड़ाने का सामान बना दिया है उन्होंने यह बात मौजूदा समय में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद को लेकर चल रही सरगर्मियों के सम्बन्ध में कही.

हज़रत ने कहा कि कभी कोई धर्म हिंसा की शिक्षा नहीं देता तो फिर धर्म के नाम पर हिंसक तांडव करने वाले यह लोग कौन हैं किसी भी हाल में इनका किसी भी मज़हब से सम्बन्ध नहीं हो सकता क्योंकि जो इंसान ही नहीं है उसका धर्म से क्या लेना देना धर्म आदमी को इंसान बनाता है और इस वक़्त समाज को इंसानों की ज़रूरत है हैवान सिर्फ विनाश कर सकते हैं हमे सचेत रहना होगा जो नफरत की बात करे उससे होशियार रहिये.

उन्होंने कहा देश तभी आगे बढ़ सकता है जब लोग डरे हुए न हों ,लोगों में मोहब्बत हो और एक साथ मिलकर काम करने का आगे बढ़ने का जुनून हो .सूफिया ने हमेशा जोड़ने का काम किया उन्होंने नफरतों को समाप्त कर मोहब्बत करने वालों का समाज बनाया यही वजह है आज भी उनके आस्तानो पर बिना धर्म-जाति के भेद के लोग आते हैं और अपनी अकीदतों के फूल चढाते हैं.

आज भी समाज को बिखराव से बचाने की ज़रूरत है हमे सियासत की गन्दी चालों से बचना होगा धर्मान्धता की अफीम के नशे में नहीं रहना होगा तभी हमारा सुरक्षित रहना संभव है .हज़रत ने साफ़ कहा कि इबादतगाहें मोहब्बतों को बढ़ावा देने के लिए हैं इन्हें नफरतों की गंदगी से बचा लीजिये और समाज में मोहब्बत सबके लिए नफरत किसी से नहीं के सन्देश को आम कीजिये.

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