एआईयूएमबी ने बलात्कारियों को फांसी की सजा देने के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की!

WordForPeace.com

गुलाम रसूल देहलवी

13 अप्रैल 2018

कठुआ जिले में आठ वर्षीय निर्दोष लड़की की बलात्कार और हत्या की निंदा करते हुए, सूफी मुस्लिमों की सर्वोच्च संस्था, आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड (एआईयूएमबी), ने अपराधियों को फांसी की सजा के लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की मांग की है।

एआईयूएमबी के राष्ट्रीय सचिव शाह हसन जामी ने कहा, “यह ‘मृत्यु दंड’ से कम नहीं होना चाहिए जो जानवरों की तरह किये गए इस वहशी और अमानवीय क्रूरता के लिए उपयुक्त है”। उन्होंने आगे कहा कि सरकार को बढ़ते हुए बलात्कार के अपराध को रोकने के लिए एक “नया कानून” लाना चाहिए।

आल इंडिया उलमा व मशायख बोर्ड के संयुक्त सचिव व और अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सय्यद सलमान चिश्ती ने कहा: “भारत में यौन उत्पीड़न (पास्को ) अधिनियम, में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ बलात्कार के लिए मौत की सजा पर एक संशोधन अनिवार्य है, क्योंकि भारत में बलात्कार की कई क्रूर घटनाएं हुईं जहां पीड़ितों में ज्यादातर लड़कियां थीं,” ।

इस त्रासदी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए, वर्ल्ड सूफी फोरम के प्रवक्ता, लेखक और मीडिया सह-समन्वयक, गुलाम रसूल देहलवी ने कहा: “असिफा की  क्रूर बलात्कार और बेरहम हत्या-एक भारतीय बेटी के साथ किये गए भयानक अपराध के तौर पर देखा जाना चाहिए हमारी आँखें खुलनी चाहिए मगर सावधान! इसे देश में हिन्दू मुस्लिम मानसिकता के रूप में चित्रित नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई मुस्लिम, हिंदू, दलित या किसी अन्य धर्म, पंथ या जाति का शिकार हो, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। “अपराध उतना ही संगीन और निंदनीय रहेगा।

श्री देहलवी ने कहा: “कुछ ऐसे लोग हैं जो निर्दोष असिफा के साथ हुई बर्बरता को इस तरह देख रहे हैं कि क्योंकि वह मुस्लिम बेटी हैं, गुर्जर और बकरवाल आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं।हालाँकि किसी भी भारतीय नागरिक के लिए जो इस भयानक विकास से ईमानदारी से चिंतित हैं, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता- मुस्लिम या हिंदू हमें जो चिंता है, वह झूठी धार्मिक पहचान के भेस में क्रूरता और उत्पीड़न है और धर्म के आधार पर किसी भी विभाजन से ऊपर उठने वाले सभी पीड़ितों के लिए न्याय कि मांग होनी चाहिए। कठुआ की 8 वर्षीय मुस्लिम लड़की और उन्नाव की 18 वर्षीय हिंदू लड़की, क्रूरता की प्रकृति रखने वाले ‘अमानवीय’ पुरुषों की शिकार हुई हैं । वे एक सभ्य समाज का हिस्सा नहीं थे हमें उनके भारतीय होने की वजह खुद को शर्मिंदा महसूस करना चाहिए। हालांकि, भारत में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की भावना को ट्रिगर नहीं करना चाहिए। “

उन्होंने कहा: “प्रधान मंत्री ने देश को आश्वासन दिया है कि कोई अपराधी बख्शा नहीं जाएगा और” हमारी बेटियों को निश्चित रूप से न्याय मिलेगा “, हमें देखना होगा कि क्या पूरा न्याय दिया जाएगा। और यह केवल तभी संभव है जब बलात्कार के अपराधियों को मृत्यु के लिए फांसी दी जाती है”।

इस संबंध में, एआईयूएमबी के कार्यवाहक सचिव और एक वरिष्ठ पत्रकार श्री यूनुस मोहानी ने एक चुभता हुआ  सवाल उठाया। उन्होंने पूछा: “क्या यह ‘न्यू इंडिया’ ‘उदार और प्रगतिशील’ लोगों से संबंधित है, जो लंबे समय तक अपने समाज में ऐसे घिनौने अपराधों को देख रहे हैं, और अब लगभग एक दैनिक आधार पर?” उन्होंने कहा क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में भी कहा है”, “हमें समझ में नहीं आता हैं कि आरोपी को गिरफ्तार करने की बजाय पुलिस ने क्यों शिकायतकर्ता को पहले गंभीर मामलों के संबंध में गिरफ्तार किया है।

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