काला धन बनाम नकदी: कितनी कारगर होगी विमुद्रीकरण प्रक्रिया, काले धन को रोकने में ?

By Ashwini Singh

सेवा में

माननीय प्रधानमंत्री/प्रधानसेवक नरेन्द्र मोदी जी!

प्रधानमंत्री/प्रधान सेवक कार्यालयइंडिया (दैट इज भारत)।

खुला पत्र

विषय : काला धन बनाम नकदी : कितनी कारगर होगी विमुद्रीकरण प्रक्रिया, काले धन को रोकने में ?

सादर प्रणाम,

कोई भी कालाधनधारक कैश/नकदी मुख्यतः तात्कालिक उपभोग जरूरतों और लाभदायक सौदों पर खर्च करने भर के लिए रखता है। लाभदायक सौदें जैसे जमीन, सोना-चाँदी, हवाला के माध्यम विदेशी बॉड में निवेश कर कैश के बोझ से मुक्त हो जाता है। कालाधन पैदा करने की भी एक प्रक्रिया हैजो कैशलैश भी हो सकती है। जी हाँ! कैशलैश इकॉनमी भी ब्लैकहो सकती है।जी हाँ! कैशलैश इकॉनमी भी ब्लैकहो सकती है।

काली कमाई का मतलब नकद रुपए का संग्रहण कर उसके ऊपर घाघ की तरह बैठ जाना नहीं बल्कि उसे को और अधिक गति देना है। इसे हमें समझना होगा कि वाइट एक्टिविटीज की तरह ब्लैक एक्टिविटी बचा-बचा कर खर्च नहीं की जाती बल्कि और अथिक अंधी कमाई के लिए झोक दी जाती है। मुख्य बात यह हैकालिख धंधा/रिश्वत खोरी करने वालो की मोटी कमाई से प्राप्त नगद-मुद्रा भी विनिमय माध्यम जिसका कुछ अंश नकद-मुद्रा के रूप में संचित रह जाता है शेष पूंजीसंपत्ति के दूसरे रूपों में परिवर्तित हो कर और अधिक धन पैदा करती है। अतःकाला धन सिर्फ नगद में नहीं है। नगद में तो उसका अंश भर है।

परन्तु एक दिहाड़ी करने वाले व्यक्तिजिसका विविध कारणों से बैंक में अकाउंट नही है। उसका 100% संचित धन नगद-मुद्रा में ही है। नगदी पर की गयी सर्जिकल स्ट्राइक में वो ही मरा है। आपकी सरकार जहाँ कैश के केस में 50 हजार रुपये से ऊपर जनधन में और 2.5 लाख से ऊपर समान्य खाते में जमा करने पर जबाब देना होगा । एक पुरुष और एक विवाहित स्त्री और दो लड़कियों वाले परिवार में एक किलो सौ ग्राम सोना कानून जायज । मतलब लगभग 33 लाख रुपये तक कोई पूछ-ताछ नहीं।

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