मौलाना मोहम्मद अली जौहर

By WordForPeace.com
मौलाना मोहम्मद अली जौहर का जन्म 10 दिसम्बर 1878 को रामपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ।
ये वही शख्सियत है जिन्होंने अपने क़लम से ही अंग्रेजों शासकों को हिला के रख दिया था। इन्होंने सन 1911 में ‘कामरेड’ नामक साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला था। इस समाचार पत्र में अंग्रेजी शासक की बहुत आलोचना की उसके हर गैर इरादे को अपने क़लम से नाकाम बनाने में सक्षम रहे इस तरह अंग्रेजी शासक के खिलाफ अपने क़लम को तलवार बना के देश की आज़ादी के लिए लड़े। तत्कालीन अंग्रेज़ सरकार द्वारा 1914 में इस पत्र पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था तथा मोहम्मद अली को चार साल की सज़ा दी गई। मोहम्मद अली ने ‘खिलाफत आन्दोलन’ में भी भाग लिया और अलीगढ़ में “जामिया मिलिया इस्लामिया”‘ की स्थापना की, जो बाद में 1920 में दिल्ली स्थापित किया गया। ये जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सबसे पहले वाईस चांसलर रहे।
वो ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के संस्थापक भी थे
मौलाना मोहम्मद अली जौहर पत्रकार,क्रन्तिकारी और शायर थे । उन्होंने बरेली, आगरा और इंग्लैण्ड में अपनी शिक्षा प्राप्त की थी।
ये प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और क्रन्तिकारी थे जिन्होंने हर कदम पे अंग्रेजी शासकों के गलत नीति पे आवाज़ उठाई और अंग्रेजी हुकूमत के इरादे को चखनाचूर और नाकाम करने में एक बहुत बड़ा योगदान दिया।
फिर से वो 1913 में उर्दू में हमदर्द नामक दैनिक पत्र शुरू किया। इसमें भी अपने क्रांति को बरकरार रखा और हर मोड़ पे लड़ते रहे ।
उनका एक शेर है
“देखो-दौर ए हयात आएगा कातिल तेरी क़ज़ा के बाद,
है इब्तिदा हमारी तेरी इंतिहाँ के बाद।
उन्होंने से शेर अंग्रेजी हुकूमत पर निशाना करते हुए कहा। वो बहुत बड़े शायर थे जो उन्होंने कई शायरी लिखी जिसमे उन्होंने कई हिंदुस्तान के दिग्गज नेताओं के भी अपने क़लम ले खूब पोल खोले।
नेहरू रिपोर्ट की आलोचना के क्रम में उन्होंने जवाहर लाल को खूब लताड़ा।
कहा “बिल्ली बन जाओ पर ऐसे बाप का बेटा मत बनो”
फिर कहा खुदा ने इंसान बनाया,शैतान ने मुल्क, मुल्क बाँटता है और मजहब जोड़ता है
वो क्रांति भरे अपने अल्फ़ाज़ और जज़्बात को कभी खामोश होने नही दिया । भारत के बारे में कहा जहाँ तक भारत का सवाल है मैं पहले,दूसरे,और अंतिम हर पायदान पर भारतीय हूँ और इसके अलावा कुछ नहीं।
सन 1930 में मोहम्मद अली लन्दन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन में उपस्थित हुए। जहाँ 4 जनवरी, 1931 में उनका देहान्त हो गया।

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