रोजेदारों को सेहरी के लिए उठाते हैं ये हिन्दू बैरागी बाबा

post-feature-image
रायपुर। हिंदू-मुसलमान। दो ऐसे धर्म, जिन्हें लेकर देश में सामाजिक, राजनीतिक विचारधाराएं हमेशा से अलग-अलग रही हैं। कभी धर्म के नाम पर हिंसा भड़काने का काम किया जाता है तो कभी राजनीतिक रोटियां सेंकने का। लेकिन राजधानी के बैरागी बाबा धर्म की सरहदों को पार कर दिलों को जोड़ने का काम कर रहे हैं। हिन्दू परिवार में जन्मे केवट दास बैरागी रमजान के दौरान रोजेदारों को सेहरी के लिए जगाते हैं, यही नहीं वे आखिरी के पांच रोजे भी रखते हैं। ये सिलसिला कई सालों से जारी है।
राजातालाब इलाके में रहने वाले ज्यादातर मुस्लिम सुबह 60 साल के बैरागी बाबा के गीत सुनकर ही उठते हैं। रात करीब 1:30 बजे बाबा की नींद खुल जाती है। ‘मेरे रमजान करम इतना किए जा, मुझ पर याद ताजी तेरी दीदार बरस मैं पाऊं…’ हाथ में घुंघरू बांध, पाक चादर ओढ़े, ढोलक की थाप के साथ यही गीत गाते बाबा बैरागी लोगों को सेहरी करने का संदेश देते हुए जगाते हैं। वे बताते हैं कि करीब 15-17 साल पहले उनके सपने में कोई बाबा आए थे। उन्होंने कहा कि जा, बाहर जाकर लोगों को सेहरी करने उठा। इस सपने को उन्होंने अल्लाह का हुक्म मान लिया और तबसे रोजेदारों को जगाने की जिम्मेदारी संभाल ली।
केवट बाबा पढ़े लिखे नहीं हैं लेकिन भजन और गीत आसानी से सीख जाते हैं, वे कहते हैं कि ऊपरवाले की मेहरबानी है जो मैं उनके बंदों के कुछ काम आता हूं।
रमजान के महीने में केवट बाबा रोज सुबह पांच किलोमीटर पैदल चलते हैं। राजातालाब क्षेत्र के लोगों का कहना कि सालों से रमजान के दौरान वे केवट बाबा की आवाज से ही उठते हैं। वे कहते हैं कि उनकी ढोलक और गीत में अलग ही आकर्षण है, जो उनकी आवाज कानों में पड़ते ही नींद खुल जाती है।
साभार – भास्कर

Check Also

Why India needs to worry about the ISIS? Reproducing an early chronicle as reminder

WordForPeace.com Washington: The scorching pace with which the jihadists of the Islamic State in Iraq …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *