लखनऊ में 4 दिसंबर को सुन्नी सूफी सम्मेलन: ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड

लखनऊ कार्यालय में हुई मीटिंग में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

WordForPeace.com Correspondent

लखनऊ-5 अक्तूबर 

सुन्नी सूफी मुसलमानों की प्रतिनिधि संगठन ऑल इंडिया उलेमा व मशाईख बोर्ड की एक बैठक प्रदेश कार्यालयलखनऊ में आयोजित हुई, जिसमें उ० प्र० के पदाधिकारियों, दरगाहों के सज्जादा नशीन,मशाईखविद्वानोंमस्जिदों के इमामों ने भाग लिया।

इस अवसर पर ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछोछवी ने कहा कि आज जब सुन्नी मुसलमान जागरूक हो चुका है और उन लोगों के जो सुन्नी मुसलमानों को धोखा देकर उनके ईमान व अकीदे पर डाका डालते रहे हैं, उनको उजागर कर दिया है तो ये लोग चोला बदल कर फिर से सामने आ रहे हैं। इसी संदर्भ में जमीअतुल उलेमा हिंद ने अजमेर शरीफ में सम्मेलन करने का फैसला किया है और सम्मेलन से पहले राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल वाहिद खत्री ने एक बैठक करके यह घोषणा की थी कि हमारा वहाबियत से कोई सम्बन्ध  नहीं है बल्कि हमारा सिलसिला चिश्तियत से है। मौलाना किछोछवी ने सवाल किया कि क्या जमीअतुल उलेमा अपने सौ साला अकीदे  से तौबा कर रही है या सुन्नी सूफी मुसलमानों को फिर चोला बदल कर धोखा देना चाहती है और गुमराह करना चाहती है। उन्होंने सवाल किया कि आज तक हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के संबंध में अभद्र टिप्पणी करते रहे हैं सूफियों की मजार पर जाने वालों को कब्र परस्त  और बिदअती जैसे उपनाम से पुकारते रहे हैं। मिलाद पढ़ने को  हराम कहते रहे हैं तो आज क्यों वे पहली बार नातिया मुशायरा कराने की बात कर रहे हैंक्यों अपना सिलसिला चिश्तियत से जोड़ रहे हैंक्यों पहली बार सभी दरगाहों  के सज्जादा नशीनों को अजमेर शरीफ में आमंत्रित करके सम्मेलन  करने जा रहे हैं?

मौलाना ने कहा कि उनका मतलब केवल सुनी सूफी मुसलमानों को गुमराह करना है जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मौलाना ने कहा कि आज कुछ लोग कहते हैं कि साम्प्रदायिक मतभेद को भुलाकर हमें एकजुटता दिखानी चाहिए लेकिन यहां साम्प्रदायिक मतभेद तो है ही नहीं बल्कि हमारा और उनका मतभेद अकीदे में है जिस से किसी हालत में समझौता नहीं किया जा सकता है।

मीटिंग में ऑल इंडिया उलमा व मशाईख बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष हजरत शाह अम्मार अहमद अहमदी, सज्जादा नशीन खानकाह हज़रत शैखुल आलमरुदौली शरीफ ने कहा कि इस समय हमारी जिम्मेदारी है कि जनता का सही मार्गदर्शन करें। इसी संदर्भ में उन्होंने अपनी राय रखी कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक सुन्नी सूफी सम्मेलन का आयोजन किया जाए जिसमें मुसलमानों के सामाजिकआर्थिक और शैक्षिक मुद्दों पर जोरदार आवाज उठाई जाए। मीटिंग  में मौजूद सभी लोगों ने यूपी अध्यक्ष के इस राय से सहमति जताई  और 4 दिसंबर 2016 दिन इतवार सम्मेलन की तिथि निर्धारित की गई।

गौरतलब है कि बाद नमाज़े ज़ोहर से मगरिब तक  चलने वाली इस महत्वपूर्ण मीटिंग का नेतृत्व बोर्ड के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ किछोछवी व अध्यक्षता हजरत शाह अम्मार अहमद अहमदी ने की।

सैयद हम्माद अशरफ किछोछवी (यूपी महासचिव) ने आए हुए सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर मोलाना सय्यद  मेराज अशरफ जाईसीमौलाना नूरुलहुदा मिस्बाहीमौलाना गयासुद्दीन मिस्बाही ने भी संबोधित किया।

बैठक में मौलाना इश्तियाक कादरी (लखनऊ अध्यक्ष)आले रसूल अहमदरमजान अली,सैयद नैयर अशरफ किछोछवी, सैयद कमाल अशरफ किछोछवीसैयद अहसान अलीहाफिज मुबीन अहमदकारी जमशेदकारी आमिर रज़ालाल शाह कादरी, आबिद सक्लैनी, फहद शाह  व लखनऊ इकाई सहित प्रदेश के सभी जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मीटिंग का समापन सलाम और देश के लिए शांति की दुआ से हुई।

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