शांति स्थापित करने के लिए ज़रूरी है अमनवादी तथा आशावादी इंसान Building peace means building the peace-loving man

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M. Fathullah Gulen 
शांति स्थापित करने के लिए ज़रूरी है कि अमनवादी तथा आशावादी इंसान बनाया जाये। जब तक मनुष्य को समस्या के समाधान के केंद्र बिंदु पर नहीं रखा जाएगा तब तक किसी भी प्रकार की राजनितिक तथा कानूनी व्यवस्था पर निवेश करना समय तथा संसाधनों की बर्बादी ही है.
ईश्वर, जो सारी सृष्टि का रचियता है उसने मनुष्य में प्रकृतिक रूप से अच्छे गुणों का ही समावेश किया है. लेकिन इंसान ने स्वार्थवश प्रकृति द्वारा मिली ताकतों का दुरूपयोग किया है यदि इतिहास के धुँधलें पन्नों को पलट कर देखा जाये तो ऐसे कई उदहारण है जिसमें इंसान ने सत्ता, शासन तथा ज़मीन के लालच में दूसरे इंसानों की जानें लीं है. भूकंप, सुनामी जैसी प्राकतिक आपदाओं ने किसी मनुष्य को इतनी हानि नहीं पहुंचाई जितनी एक व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति को हानि पहुंचाई है. जब तक मनुष्य के स्व्भाव में आये इस प्रकार के उग्र बदलाव का उपचार नहीं होता, तब तक इसका समाधान असंभव है.

सरकारी संस्थान तथा प्रशासन अपने निजी हित को ध्यान में रखते हुए ऐसी शैशणिक नीतियां बनाते हैं जिससे आने वाली पीढ़ी केवल उनकी पार्टी, विचारधारा तथा उनके नियमों का ही समर्थन करे. इस प्रकार के सवार्थपूर्ण रवैय्ये इंसान के शांतिप्रिय बने रहने में सहायक नहीं। इसलिए, शांतिप्रिय इंसान बनाने के लिए नागरिक समाज का योगदान बहुत आवश्यक है. नागरिक समाज के लिए बहुत ज़रूरी है कि वो ऐसे लोगों को एकत्रित करे. विशेष रूप से उस दौर में, जिसमें राजनैतिक  नेता नागरिकों को वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करते हैं. नागरिक समाज की गतिविधियां ऐसी हों जो शिक्षा तथा मीडिया की हिफाज़त कर सके ताकि आने वाली पीढ़ी को शांति, अमन, सहिष्णुता आदि सवांद के लिए तैय्यार किया जा सके.
सभी धर्मों तथा नैतिक सिद्धांतों का उदेशय केवल शांति प्रिय इंसान का निर्माण करना है. अंतर्राष्ट्रीय, पारस्परिक तथा दूसरे तत्वों के साथ अमन तभी संभव है जब तक  मनुष्य को आंतरिक शांति प्राप्त न हो जाये। मेरा ये मानना है कि मनुष्य में तर्क करने की क्षमता पैदा करके अमनवादी सोच को जागृत किया जा सकता है. लेकिन प्यार, अमन जैसे चीज़ें तभी संभव हैं जब इसे धर्म से ऊपर उठकर देखा जाये। बड़े दुःख की बात है कि, अपने राजनितिक हित को छुपाने के लिए विश्व के सभी प्रमुख तथा बड़े धर्मों का कट्टरपंथियों द्वारा दुरूपयोग किया गया है. सभी प्रमुख धर्म तथा उनके नैतिक सिद्धांत विश्व में शांति स्थापित करने के लिए पर्याप्त है. युद्ध तथा विवाद के लिए धार्मिक ग्रथों की आयतों को तोड़ मरोड़ कर इस्तेमाल करना, उनका शोषण करना न केवल मनुष्य के बल्कि धार्मिक ग्रथों की दृष्टि में भी उद्दंडता है.

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