सूफी मुस्लिमस् यूथ एससोसियशन (सुमैया) ने कायम की नई मिसाल: मजहब-जाति के भेद भूल कर इंसानियत की खिदमत

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रीट परीक्षा के लिए दिखा इंसानियत का जज्बा, अभ्यर्थियों के ठहरने के लिए खोल दी मस्जिद, दरगाह
डीडवाना: एक ओर जहां देशभर में धार्मिक और जातीय भेदभाव चरम पर है, वहीं इस दौर में भी इंसानियत जिंदा है। इंसानियत का तकाजा भी कुछ ऐसा है, जहां धर्म, जाति और वर्ग की सभी बंदिशें भी दूर हो गई। रविवार को रीट की परीक्षा के दौरान डीडवाना में ऐसे मामले नजर आए, जिसमें अध्यापक पात्रता परीक्षा देने आए अलग-अलग जाति और समुदाय के परीक्षार्थियों के लिए सभी समाजों द्वारा ठहराने की व्यवस्थाएं की गई।
सबसे रोचक और साम्प्रदायिक सौहार्द का मामला मोहल्ला काजियान में सामने आया। इस मोहल्ले में सूफी मुस्लिम यूथ एसोसिएशन (सुमैया) के कार्यकर्ताओं ने हिंदू समुदाय के युवाओं को रात में ठहराने के लिए मस्जिद और दरगाह जाफर शहीद के दरवाजे खोल दिए। 
शहर काजी रेहान उसमानी के निर्देशन में सुमैया की टीम ने परीक्षार्थियों को रात में कड़ाके की सर्दी से बचाने और उचित आश्रय देने की पहल कर उन्हें ना केवल आश्रय दिया, बल्कि उनके खाने-पीने और परीक्षा केन्द्र तक वाहनों से छोडऩे की भी व्यवस्था की। संगठन के कार्यकर्ता शनिवार रात को बस स्टैंड ओर रेलवे स्टेशन घूमते रहे और खुले में रात बिता रहे परीक्षार्थियों को बुलाकर उन्हें आश्रय दिया। इस दौरान मस्जिद काजियान के हॉल में 23 युवाओं को ठहराया गया, वहीं दरगाह जाफर शहीद में 27 परीक्षार्थियों को रुकवाया। उनके लिए रजाई, गद्दे, कम्बल आदि की व्यवस्थाएं की गई।
इस दौरान टोंक जिले से आए सीताराम, सुरेश मीणा, पन्नालाल बैरवा, मोलेश गुर्जर, दीपक कुमार, महावीर वर्मा, राजूलाल मीणा, भीलवाड़ा के कन्हैयालाल, शिवराज मीणा, लोकेश कुमावत, पाली के पिंटू सांखला, रमेशचन्द्र बैरवा, अजमेर से अशोक साहू, सुरेश मीणा ने इस पहल को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि परीक्षा के लिए वे लोग रात को ही डीडवाना पहुंच गए, मगर होटलों में सीमित जगह होने से ज्यादातर युवाओं को जगह नहीं मिली पाई। ऐसे में वे लोग बस स्टैंड पर रात गुजारने को मजबूर थे। जबकि परीक्षा के कारण वे पहले से परेशान थे, उपर से खुले में सर्द रात गुजारे जाने से भी वे परेशान हो रहे थे। ऐसे में सुमैया के कार्यकर्ताओं ने अनजान होकर भी जिस तरह उनकी मदद की है, वो इंसानियत की जिंदा मिसाल है। *सूफी मुस्लिमस् युथ एससोसियशन (सुमैया)* की टीम में ये रहे मौजूद-
 काजी रेहान उस्मानी, फ़ैज़ अहमद उस्मानी, अनीक अहमद उस्मानी, मोहम्मद ज़ाहिद सिद्दीकी,नदीम अहमद सिद्दीकी,इमरान उस्मानी, नईम उस्मानी, अज़हरुद्दीन,रशीक अहमद उस्मानी, लतीफ उस्मानी, साबिर उस्मानी, तालिब उस्मानी, जावेद उस्मानी, मसरूर उस्मानी, जुनैद सिद्दीकी ओर अफसान सिद्दीकी
मजहब की दीवार ढहाते हुए इन सदस्यों ने मानवता को पहले माना और रात भर इनकी सेवा में लगे रहे।

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