हज़रत मुहम्मद (स.) की महत्वपूर्ण शिक्षा: अमानवीय हरकत करने वाला पहले अपने धर्म का दोषी Prophet’s crucial message on Eid Mulad-un-Nabi 

Ghulam Rasool Dehlvi, Editor, Wordforpeace.com
ईद मिलादुन्नबी
गुलाम रसूल देहलवी

ईद-उल-फ़ितर और ईद-उल-जुहा की तरह मुस्लिम समुदाय ईद मिलादुन्नबी भी मनाते हैं। इस साल ईद मिलाद-उन-नबी अर्थात पैगंबर मुहम्मद का जन्मदिन 2 दिसंबर को है।
 यह इस्लामी महीने रबी ‘अल-अव्वल के बारहवें दिन हर साल मनाया जाता है। 570 ईसवीं को मक्का शहर में पैगंबर इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.) नफरतों को मिटाकर प्यार, सहिष्णुता और मानवता की सेवा को आम करने के लिए पैदा हुए। उन्होंने अरब जगत में जारी हर तरह के आतंकवाद, असहिष्णुता, जुल्म-ज्यादती को खत्म करके मानवता के लिए प्रेम, रहमत और स्नेह का संदेश दिया।

उन्होंने अपने पूरे जीवन में ईश्वर की भक्ति, पूजा और धार्मिक इबादत के साथ-साथ सामाजिक सेवा पर न सिर्फ बल दिया बल्कि खुद भी पालन करके मानव-सेवा को भक्ति पर भी प्राथमिकता दी। गरीबों और जरूरतमंदों की आवश्यकताएं पूरा करने में किसी भी तरह धार्मिक या सामाजिक पूर्वाग्रह से बचने की तालीम दी। हज़रत मुहम्मद (स.) की महत्वपूर्ण शिक्षा यह थी कि किसी भी धर्म का अपमान न किया जाए और न ही किसी इबादतखाने या पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाया जाये। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाकर ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं की जा सकती।

ईद मिलादुन्नबी के मौके पर हजरत मुहम्मद (स.) के मार्ग पर चलते हुए कोशिश करें कि अपने क्षेत्र के गरीब मुहल्लों और अस्पतालों तक पहुंचें और मरीजों की देख-रेख और मदद करें और संभव हो सके तो उन्हें कुछ तोहफे और फल भी पेश करें। इससे यह संदेश मिलेगा कि ईद मिलादुन्नबी उस हस्ती के आगमन की खुशी का दिन है, जो सभी के लिए रहमत और उल्लास के दूत बनाकर भेजे गए। आज मुस्लिम जगत में इस्लाम के नाम पर जारी धार्मिक कट्टरपंथ ने दुनिया भर में ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि एक गैर मुस्लिम भाई किसी भी मुसलमान का नाम सुनते ही दहशत में आ जाता है। आज एक मुसलमान दूसरों की नफरत का शिकार हो रहा है।

हकीकत यह है कि धार्मिक कट्टरपंथ न इस्लाम की शिक्षा है और न ही किसी अन्य धर्म की। मुहम्मद (स.) ने ऐसे तरीके कभी नहीं अपनाए कि बंदूक की नोक पर जबरन अपना धर्म स्वीकार कराया जाए। यह इस्लाम और पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद (स.) की सबसे बड़ी गुस्ताखी और उनके मार्ग से बगावत है।

मुसलमानों को चाहिए कि ऐसी हर विचारधारा को इस गंगा-जमुनी समाज के हर हिस्से से खत्म करें जो धर्म के नाम पर हिंसा और कट्टरवाद फैलाती है। आज ईद मिलादुन्नबी का संदेश यह है कि धर्म की पोशाक ओढ़कर अमानवीय हरकत करने वाला सबसे पहले अपने ही धर्म का विद्रोही और दोषी है। इसलिए जरूरी है कि ऐसे लोगों के खिलाफ पहले उसी मजहब के जिम्मेदार लोग आगे आएं।

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