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खैर (भलाई) शर्र (बुराई) से ज्यादा ताक़तवर है

सबसे पहले कुरान ऐ करीम की इस आयत को सुने

 وَقِيلَ لِلَّذِينَ اتَّقَوْا مَاذَا أَنزَلَ رَبُّكُمْ ۚ قَالُوا خَيْرًا ۗ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُوا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌ ۚ

“और जब तक्वा वालो से कहा गया कि तुम्हारे रब ने क्या नाजिल फ़रमाया तो उन्होंने जवाब दिया: खैर (भलाई/ अच्छाई). जिन लोगों ने इस दुनिया में भलाई की, उनके लिए भलाई है.”

…यह एक ऐसी आयत है जो पुरे दीन का खुलासा करती है. यानी दीन को नाजिल करने का सिर्फ एक मकसद है, और वो है: खैर (अच्छाई)!

यह आयत बताती है कि दुनिया में सिर्फ अच्छाई का दामन पकड़ना एक मोमिन का शेवा है… यह बताना क्यों ज़रूरी है?… क्युकि कुछ लोग अपनी ज़िन्दगी को हमेशा ज़घडो और टकराव (conflict) में उलझाये रखते हैं… कुरान के मुताबिक़ ऐसा करना बिलकुल गलत है. कुछ लोग शर्र (बुराई) से लड़ने के लिए बुराई को ही एक वाहिद तरीका मानते हैं… यह भी बिलकुल गलत है… कुछ लोग मुसलमानों में इस ख्याल को फैलाते हैं कि इस्लाम और पूरी दुनिया का निज़ाम और इंसानी समाज टकराव पर कायम है… यह बात बिलकुल ही बे बुनियाद है… यह ख्याल दहशतगर्दी (terrorism) और तशद्दुद (violence) को फैलाने का काम करता है… अगर बुराई को बुराई से लड़ने की कोशिश करेंगे तो फिर बुराई कब मिटेगी?

सही रास्ता तो यह है कि हमें खैर (अच्छाई) की ताक़त पर सबसे ज्यादा यकीन रखना चाहिए, क्युकि अच्छाई सबसे ज्यादा ताक़तवर हथियार है… अच्छाई न सिर्फ दौलत से ज्यादा ताक़तवर है, बल्कि सारे हथियारों से, और हर किस्म के टकराव और तशद्दुद से ज्यादा ताक़तवर है, क्युकि खैर (अच्छाई) का ता’अल्लुक खुदा की ज़ात से है.

कुरान में एक कानून है जिसको “इजाहा” यानी किसी चीज़ को अपनी जगह से हटाना (displacement) कहते है, अल्लाह इरशाद फरमाता है:

 إِنَّ الْحَسَنَاتِ يُذْهِبْنَ السَّيِّئَاتِ

“बेशक अच्छाईयां बुराइयों को ख़तम कर देती हैं” (सुरह हुद: 114)

कुरान का यह कानून हमें यह सिखाता है के हर हाल में अच्छाई पर साबित क़दम रहना चाहिए, चाहे बुराई कितनी भी हो. इस से हमें यह भी सीख मिलती है कि बुराई को बुराई से नहीं, बल्कि अच्छाई से ख़तम किया जा सकता है. बुराई को ख़तम करने के लिए तशद्दुद और टकराव के रास्ते को कभी नहीं अपनाना चाहिए, क्युकि बुराई से निपटने के लिए अच्छाई ही सब से बेहतरीन हथियार है.

कुरान में अच्छाई की की ताक़त का इस से बड़ा सबूत और क्या हो सकता है के अल्लाह तआला एक आयत में इरशाद फरमाता है:

وَمَا تُنفِقُوا مِنْ خَيْرٍ يُوَفَّ إِلَيْكُمْ وَأَنتُمْ لَا تُظْلَمُونَ

यानी जिस ने रत्ती भर भी अच्छाई से काम किया उसे उसका भरपूर इनाम दिया जाएगा और उसके साथ कभी गलत नहीं होगा… अच्छे आमाल कभी ज़ाया नहीं होते… और अल्लाह तआलाह का यह भी फरमान है:

فَمَن يَعْمَلْ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ خَيْرًا يَرَهُ

“जिस ने एक रइए के दाने के बराबर भी अच्छाई बरती हो, उसे उसका भरपूर बदला दिया जाएगा”.

इसका मतलब यह हुआ के हमें इस दुनियां में अच्छाई की ताक़त से लोगों के दिलों को जीतना चाहिए, न कि तशद्दुद, हिंसा, ज़ुल्म और टकराव के रास्ते को अपनाना चाहिए, अल्लाह का फरमान है:

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا ارْ‌كَعُوا وَاسْجُدُوا وَاعْبُدُوا رَ‌بَّكُمْ وَافْعَلُوا الْخَيْرَ‌ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ

“ए ईमान वालो, रुकू’ और सजदा करते रहो और अपने परवरदिगार की इबादत में लगे रहो और नेक काम करते रहो, ताकि तुम कामयाब हो जाओ”. (सुरह हज्ज: 77)

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