सामाजिक भावनाओं के आहत करने का हक़ किसी को नहीं No Right to Hurt Communal Sentiments

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अंतर्राष्ट्रीय शांति सम्मेलनों में भाग लेने वाले आतंकवाद के विरुद्ध बड़ी बेबाकी से अपना पक्ष रखने के लिए विख्यात इस्लामिक स्कॉलर गुलाम रसूल देहलवी ने बड़ी तफसील विश्व भर में धर्म के नाम पर फैली या फैलाई जा रही अशांति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस तरह के बयान सोशल फैब्रिक को तोड़ते हैं। कम्युनल हारमनी को डिस्टर्ब करते हैं। ऐसे लोगों का एक ही इलाज है कानूनी करवाई। सरकार को ऐसे विषयों पर गंभीरता दिखाने की आवश्यकता है। किसी भी धर्म या समुदाय को के किसी भी व्यक्ति विशेष को देश के किसी भी नागरिक की धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं के आहत करने का कोई हक़ नहीं है। संविधान के नाम और आज़ादी का नाम लेकर दूसरों की आज़ादी में बाधा डालने को संविधान अपमान माना जाये और कड़ी करवाई की जाये ताकि कोई दूसरा इस तरह की अभिव्यक्ति से पहले कई बार सोचे और कोई भी राजनैतिक गिरोह इस तरह के हथकंडे अपनाने से बाज़ आये।
[हसन हैदर] नया सवेरा न्यूज़ पोर्टल लगातार तीन दिनों से सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की नाकाम कोशिश करने वाले वसीम रिज़वी के आपत्तिजनक बयान पर मुसलिम धर्म गुरुओं, धार्मिक संगठनों और और सामाजिक संस्थाओं से संपर्क में है। बीस से ज़्यादा शिया सुन्नी संगठनों से बात चीत करने के दौरान सभी सामाजिक और धार्मिक ज़िम्मेदारों ने मिल कर यूपी सरकार में वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी का बायकाट किया है और लोगों से इस तरह के असभ्य बयानों पर ध्यान ना देने की बात कही है शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने तो पूरे शिया समुदाय से अपील की है कि वसीम रिज़वी को अपने किसी भी प्रोग्राम में शामिल ना होने दें।

गुस्ताखिये सहाबा की मुखालिफत में आगे आने वाली संस्था आल इंडिया उलमा व मशाईख़ बोर्ड, वर्ल्ड सूफी फ़ोरुम के अलावा मजलिस मशावरत, जमाते इस्लामी हिन्द, जमीअत उलमा ए हिन्द और आल इंडिया यूनाइटेड मुसलिम मोर्चा ने किसी भी हाल में सामाजिक सौहार्द को बनाये रखने की अपील की है।

गौसिया फलाहे मिल्लत फाउंडेशन के चेयरमैन और गौसिया मस्जिद जसोला विहार के इमाम व ख़तीब मौलाना जैनुल्लाह निज़ामी ने कहा कि हम एक सेक्युलर मुल्क में रहते हैं। हमारा संविधान हमें हमारी मज़हबी आज़ादी देता है और हमारी हर उस आज़ादी पर पाबन्दी भी लगाता है जिस दूसरे की आज़ादी पर प्रभाव पड़ता है। उन्हों ने कहा कि मुल्क का माहौल ख़राब करने वाले ऐसे किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हमारी सरकार और क़ानून व्यवस्था को ऐसे संगीन मसले संज्ञान में ले कर त्वरित मुनासिब एक्शन लेने की ज़रूरत है वरना एक मेसेज यह भी लोगों में पहुँचने लगता है कि सरकारी की ख़ामोशी खुद सरकार की साज़िश तो नहीं है।

जामिया हज़रात ख्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के डायरेक्टर, गौसुल आलम मैगज़ीन के सहायक संपादक और इस्लामी स्कॉलर एवं वक्ता मौलाना मकबूल मिस्बाही ने कहा कि वसीम रिज़वी की कोई मज़हबी या इस्लामी हैसियत नहीं है। वो कुछ सियासी गुटों, एजेंसियों और विचारधारा के लिए चाटुकारिता कर रहे हैं और राजनैतिक प्रोपगंडा फैला कर पार्टी विशेष को सियासी फायदा पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।

लिमरा होम्स और लिमरा फाउंडेशन के सरबराह मौलाना अक्लीम रज़ा मिस्बाही ने कहा कि किसी को भी कुछ बोलने से पहने यह देखना चाहिए क्या वह क्या बोल रहा है। किसी भी ऐसे बयान से गुरेज़ करना चाहिए जिस से किसी दूसरे व्यक्ति की भावना आहत होती हो। उन्हों ने कहा कि वसीम रिज़वी के बयान को व्यक्ति विशेष की आपत्तिजनक अभिव्यक्ति मानी जाये इस से शिया समुदाय का कोई लेना देना नहीं है।

मुसलिम एरा मैगज़ीन के संपादक, ए.आई.यू.एम.बी. हेड ऑफिस के प्रवक्ता एडवोकेट यूनुस मोहानी ने कहा कि यह एक पोलिटिकल साजिश है। उन्हों ने शक ज़ाहिर करते हुए कहा कि यूपी में इस वक़्त एक अंतर्राष्ट्रीय लेवल का कुम्भ मेला चल रहा जिस में करोड़ों श्रद्धालु आस्था लीन हैं। ऐसे में कुछ तत्व दंगा भड़का कर देश की अखंड संस्कृति को नुकसान पहुँचाना चाहते है और वसीम रिज़वी उस का एक मोहरा मात्र हैं। उन्हों ने सपा और बसपा से गठबंधन की द्रष्टि से भी इस बयान को जोड़ते हुए कहा कि कुछ तो है जिस की पर्दा दारी है।

अंतर्राष्ट्रीय शांति सम्मेलनों में भाग लेने वाले आतंकवाद के विरुद्ध बड़ी बेबाकी से अपना पक्ष रखने के लिए विख्यात इस्लामिक स्कॉलर गुलाम रसूल देहलवी ने बड़ी तफसील विश्व भर में धर्म के नाम पर फैली या फैलाई जा रही अशांति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस तरह के बयान सोशल फैब्रिक को तोड़ते हैं। कम्युनल हारमनी को डिस्टर्ब करते हैं। ऐसे लोगों का एक ही इलाज है कानूनी करवाई। सरकार को ऐसे विषयों पर गंभीरता दिखाने की आवश्यकता है। किसी भी धर्म या समुदाय को के किसी भी व्यक्ति विशेष को देश के किसी भी नागरिक की धार्मिक एवं सामाजिक भावनाओं के आहत करने का कोई हक़ नहीं है। संविधान के नाम और आज़ादी का नाम लेकर दूसरों की आज़ादी में बाधा डालने को संविधान अपमान माना जाये और कड़ी करवाई की जाये ताकि कोई दूसरा इस तरह की अभिव्यक्ति से पहले कई बार सोचे और कोई भी राजनैतिक गिरोह इस तरह के हथकंडे अपनाने से बाज़ आये।

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